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यूपी: लाखों के चेक-ड्राफ्ट और 3 साल की फाइलों के साथ बाबू लापता, अनियमितता की आशंका

आशंका व्यक्त की जा रही है कि फाइलों में बड़ा घालमेल होगा, जिसकी वजह से एक साजिश के तहत गायब किया गया है.

यूपी के शाहजहांपुर में जिला प्रोबेशन कार्यालय से तीन साल में करोड़ो के बजट की फाइलें गायब हो गई हैं. इसके लिए जिम्मेदार बाबू के लापता होने का मामला सामने आया है. इन फाइलों में विधवा पेंशन, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना और बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ योजना सहित दूसरी अन्य योजनाओं की फाइलें गायब होने से हड़कंप मचा हुआ है. आशंका व्यक्त की जा रही है कि फाइलों में बड़ा घालमेल होगा जिसकी वजह से एक साजिश के तहत गायब किया गया है. फिलहाल, जिलाधिकारी (डीएम) के आदेश पर आरोपी बाबू के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

जानकारी के मुताबिक जिला प्रोबेशन कार्यालय से जो अभिलेख गायब हैं, उनमें करोड़ों रुपये के भुगतान का डेटा है. यह जानकारी सामने आने के बाद डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने विभाग के कनिष्ठ लिपिक अरविंद चित्रांश के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी है. गायब अभिलेखों में 22 लाख रुपये के चेक वाउचर, बैंक ड्राफ्ट भी शामिल हैं. सीडीओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने पूर्व में प्रमोशन का अतिरिक्त कार्यभार देख रही जिला कार्यक्रम अधिकारी को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है.

बताया जाता है कि जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीआरओ) ने गायब फाइल और पत्रावली की सूची बनाने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है. डीपीआरओ वरुण सिंह ने सदर बाजार थाने में तहरीर दी है, जिसमें कनिष्ठ लिपिक अरविंद चित्रांशी पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं. चित्रांशी पर निराश्रित महिला योजना से जुड़े 22 लाख के चेक वाउचर और बैंक ड्रॉफ्ट का दुरुपयोग, प्रयोजन कार्यालय, आईसीपीएस, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, वन स्टॉप सेंटर की 3 साल की पत्रावली और जन सूचना पत्रावली गायब करने, साक्ष्य मिटाने के लिए सरकारी कार्य में व्यवधान डालने के आरोप हैं.

जिला कार्यक्रम अधिकारी भी लपेटे में

जिला कार्यक्रम अधिकारी ज्योति शाक्य पर भी गंभीर आरोप लगे हैं, जिनके पास साल 2018 से 2020 तक प्रोविजन कार्यालय का अतिरिक्त चार्ज था. विभाग में बिना टेंडर के लाखों की स्टेशनरी खरीदी गई. इसके अलावा फर्नीचर और एसी की खरीद में भी घोटाले के आरोप हैं. सीडीओ ने जिलाधिकारी को जांच रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए डीएम ने जिला कार्यक्रम अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है. प्रयोजन के मुख्य अधिकारी बरेली मंडल ने भी कुछ माह पहले निरीक्षण किया था. तब भी करीब 15 लाख के टेंडर में अनियमितता सामने आई थी. सीडीओ की पड़ताल में करीब 80 लाख के बजट वाले प्रोजेक्ट में खामियों के साथ ही अन्य मामले भी सामने आए थे. फिलहाल, आरोपी बाबू के खिलाफ मामला दर्ज कर पुलिस तलाश में जुटी है.

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